देबारति चक्रवर्ती : गीत-नैना बहायें नीर तुम बिन कल न परे …

गीत –  नैना बहायें नीर तुम बिन कल न परे …
मिश्र राग : ताल  कहरवा
गायिका – देबारति चक्रवर्ती (कोलकाता)
तबला – अर्घ्यजीत चक्रवर्ती (Arghyajit  Chakraborty)
संगीतकार – केवल कुमार
गीतकार – अशोक हमराही
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बांग्ला और हिंदी की सुप्रसिद्ध गायिका देबारति चक्रवर्ती को संगीत विरासत में मिला। उनके पिता अजीत कुमार चक्रवर्ती जाने माने तबला वादक रहे हैं। संगीत की प्रारंभिक शिक्षा उन्हें अपने पिता से ही मिली। उन्होंने कथक नृत्य का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है। देबारति चक्रवर्ती को श्रीमती स्वाति नंदी, श्री स्वपन मुखर्जी, श्रीमती कृष्णा मजूमदार, श्रीमती हैमंती शुक्ला, श्री संदीप नाग जैसे ख्यातिप्राप्त गुरुओं से संगीत की बारीकियां सीखने का मौका मिला।वह The Dover Lane Music Conference Award विजेता रही हैं; इसके अलावा पश्चिम बंगाल राज्य संगीत अकादमी, Ranaissance Aritist and Writer’s Association of India आदि पुरस्कारों से भी उन्हें समानित किया गया है। ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन केंद्र कोलकाता की वह कलाकार हैं और बंगाल में कई चैनल पर उनके कार्यक्रम प्रसारित होतेव्रहते हैं। देबारति चक्रवर्ती का गाया मिश्र राग में ये गीत सुनकर आप आत्मविभोर हो जायेंगे। सुनिए… Like करिए .… Share करिए …..और अपने विचार भी अवश्य लिखिए।
विशेष : समय कभी नहीं रुकता है। जब कोरोना संक्रमण से बचाव हेतु लॉकडाउन के दौरान सारा विश्व थमा हुआ सा प्रतीत हो रहा था, सृजन उस समय भी जारी था। जीवन हर चुनौती से बड़ा है और उसी लॉकडाउन काल में रचे व सृजित किये गये ये गीत हमारी हर संकट से जूझने व जीतने की संस्कृति के प्रतीक हैं।
धन्यवाद 🙏
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